बेबसी

प्रतीकात्मक (Credit: Mathias P.R. Reding)

किसी की सूनी हुई मांग तो किसी के सिर से उठा साया
किसी की छ‍िनी औलाद तो किसी का इकलौता सहारा

कहीं बच्चे की जिंदगी की भीख मांगती मां
तो कहीं लाश को कंधे पर उठाए बूढ़ा बाप

रुला देती है ये मंजर, रुला देती है अपनों के छूटने का डर
जहां कल तक चहकती शाम थी, अब रुला देती है वो खाली घर

डिब्बों में बंद सांसो को देख इस महंगी जिंदगी की कीमत पता चलती है
श्मशान से उठते धुएं को देख मौत की अन‍िश्च‍ितता, गहरी सच्चाई लगती है

कई सपने टूट गए कईयों की ख्वाह‍िशें अधूरी रह गई
वक्त की सुई जहां अटकी थी अब वहीं ठहरी रह गई

हर पहर गूंजती एंबुलेंस की सायरन धड़कन बढ़ा देती है
फोन की घंटी अनहोनी खबरों की चेतावनी लगती है

बड़ी तकलीफ होती है कुछ ना कर पाने के एहसास से
कभी बेवजह शर्म‍िंदगी हो जाती है अपने बेहतर हालात पे….

ल‍िबास ही चर‍ित्र है?

तू साड़ी पहन, सलवार-सूट पहन बस इन्हीं कपड़ों में तू जंचती है. यही हमारे संस्कार हैं और यह एक आदर्शवादी नारी का पहनावा है. ऐसी सोच आती कहां से है.

आधुन‍िकीकरण की बातें करते हैं, तो क्या टेक्नोलॉजी, श‍िक्षा, इंफ्रास्ट्रक्चर में ही विकास करना है, बाकी जो सबसे अहम चीज है मानस‍िकता उसे कुंठ‍ित ही रखना है? कपड़े अगर संस्कार देते हैं तो पश्च‍िमी देश या वैसे देश जहां जींस-टॉप, वन-पीस या स्टाइल‍िश कपड़ों को नॉर्मल रोजाना के कपड़ों के तौर पर इस्तेमाल किया जाता है, वे मह‍िलाएं चर‍ित्रहीन हैं क्या. हमारे पहनावे से भला संस्कार कबसे आने लगा. संस्कार का बीज तो पर‍िवार बोते हैं जिसे आगे चलकर अच्छी श‍िक्षा और माहौल बेहतर आकार देते हैं. उन्होंने तो कभी हमें कपड़ों को लेकर कुछ नहीं सिखाया, ना ही कहा क‍ि फलाना कपड़े पहनकर आप स्कूल नहीं जा सकते क्योंकि ये असंस्कारी और असभ्य है. और हमारे कपड़ों से भला हमारे चर‍ित्र का फैसला कैसे कर सकता है कोई. क्या जींस पहनने वाली लड़की अच्छे विचारों वाली नहीं होती, क्या सिर्फ साड़ी, सलवार पहनने वाली सभ्य कहलाई जाती है. हद है, कुछ ज्यादा ही हद है.

पिछले कुछ समय में मह‍िलाओं के कपड़ों को लेकर काफी विवाद देखे गए हैं. मध्य प्रदेश के दफ्तरों में फेडेड जींस, टी-शर्ट का बैन. 2019 में बिहार के राज्य सच‍िवालय में जींस, टी-शर्ट का बैन, 2018 में राजस्थान में छात्रों के लिए ड्रेस कोड जिसमें सलवार-कमीज और कॉलेज जाने वाली लड़क‍ियों के लिए साड़ी पहनने का फरमान जारी किया गया था. 2014 में उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले में खाप पंचायत ने लड़क‍ियों को मोबाइल फोन चलाने और जींस पहनने पर पाबंदी लगा दी थी. महाराष्ट्र सरकार ने भी पिछले साल सरकारी कर्मचार‍ियों के लिए ड्रेस कोड जारी किया जिसमें मह‍िलाओं को साड़ी, सलवार, चूड़ीदार-कुर्ता, कुर्ते के साथ ट्राउजर्स, शर्ट और दुपट्टा पहनने का आदेश दिया गया है. (पुरुषों के कपड़ों में भी कुछ बदलाव हुए हैं पर मैं सिर्फ मह‍िलाओं पर फोकस्ड हूं अभी)

अरे भई हमसे साड़ी नहीं संभलती तो क्या सरकाते हुए उसे पहनते रहें. काम से ज्यादा फोकस तो साड़ी ठीक करने में ही निकल जाएगा. सलवार-सूट, कुर्ता ये पहनने में हमें कोई आपत्त‍ि नहीं है, पर कब पहनना है ये आप तय करेंगे ये मंजूर नहीं है. ना कपड़ों से हमारे कैरेक्टर के बारे में कोई जजमेंट दे सकता है और ना ही हमारा पहनावा किसी को उत्तेज‍ित करता है. उन्हें अपनी सोच और देखने का नजर‍िया बदलना होगा.

खुली तिजारी

प्रतीकात्मक तस्वीर (Pinterest)

जतन से रखते तो अमन का मुकाम होता
ना लपटें उठती ना जख्म का सैलाब होता

औरत खुली तिजारी की तरह होती है….पहले तो इस डायलॉग पर फ‍िल्म में एक्ट्रेस के जवाब ने बहुत खुश कर दिया था. लगा था कि आज की मह‍िलाएं चांद तक पहुंच गई हैं तो फ‍िर उन्हें खुली तिजोरी वाली नजर से देखना और ऐसा कहना सरासर बकवास है. पर अब लगता है कि शायद फिल्म में उस बुजुर्ग व्यक्त‍ि की यह बात सच ही थी.

निर्भया कांड हो या हाथरस कांड, उन्नाव की घटना हो या फिर हैदराबाद में मह‍िला के साथ बलात्कार और फिर निर्मम हत्या, देश में हर दूसरे दिन एक स्त्री लिंग चाहे वो कुछ महीनों की बच्ची हो या 90 साल की बूढ़ी औरत, रेप जैसी घटनाओं का श‍िकार होती है. बलात्कार तो अपराध है ही पर मह‍िलाओं के साथ शोषण के कटघरे में आने वाली अन्य हरकतें भी घ‍िनौने अपराध होते हैं. देर रात सड़क पर घूमने के लिए मह‍िलाएं आज भी संकोच करती हैं. दिन की उजली रोशनी में भी भीड़ से गुजरने में लड़की एक बार को यह जरूर सोचती है कि किसी की नजर उसकी छाती पर तो नहीं या कोई उसकी टांगों को देख तो नहीं रहा. अगर किसी नुक्कड़ या ठेले के पास से गुजरो तो पीछे से लड़के की सीटी या फिर ‘क्या माल है’ सुनने को मिल जाता है. घर का भी यही आलम है. अध‍िकांश मामलों में बलात्कार या यौन शोषण की अन्य घटनाओं को जानने वाले ही अंजाम देते हैं. कुल मिलाकर एक मह‍िला ना तो बाहर और ना घर पर सुरक्ष‍ित है.

मह‍िला सुरक्षा के नारे से गूंजा लंदन
इंग्लैंड के साउथ लंदन में साराह एवरार्ड के साथ हुई घटना ने मह‍िलाओं में जबरदस्त आक्रोश पैदा कर दिया है. 33 वर्षीय मार्केंट‍िंग एग्जीक्यूट‍िव साराह एवरार्ड की मौत ने मह‍िलाओं की सुरक्षा के दावे की पोल खोल दी है. पहले एक बार घटना को रिवाइंड करते हैं-

घटना
3 मार्च को रात के 9 बजे क्लैपहैम में दोस्त से मिलने के बाद 50 मिनट की दूरी पर स्थ‍ित अपने घर ब्र‍िक्सटन जा रही साराह अचानक गायब हो गई. रास्ते में जाने के दौरान साराह ने बॉयफ्रेंड से लगभग 14 मिनट बात की. उसे रात 9:28 बजे एक डोरबेल कैमरा के फुटेज में आख‍िरी बार देखा गया था. 4 मार्च को साराह के बॉयफ्रेंड ने उसकी मिसिंग रिपोर्ट दर्ज करवाई और फिर पुल‍िस साराह की छानबीन में लग गई. न्यूयॉर्क टाइम्स, लंदन मेट्रोपोल‍िटन पुल‍िस के मुताबिक साउथ लंदन के लगभग 750 घरों में, क्लैपहैम कॉमन्स पार्क और दक्ष‍िणी-पूर्वी इंग्लैंड के काउंटी ऑफ केंट में साराह की खोजबीन की गई. पर कहीं कुछ हाथ नहीं लगा. 9 मार्च को पुल‍िस ने 48 वर्षीय पुल‍िस कॉन्सटेबल वेन कुजेन्स को साराह के अपहरण के शक में गिरफ्तार किया. वहीं दूसरी तरफ एक 30 वर्षीय मह‍िला को वेन की मदद के शक में अरेस्ट किया. पुल‍िस के अनुसार साउथ लंदन में नियुक्त वेन उस वक्त ड्यूटी पर नहीं था. द गार्ज‍ियन और न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक वेन कुजेन्स एक अन्य मामले में भी शक के घेरे में है जिसकी जांच चल रही है. 10 मार्च को पुल‍िस ने केंट स्थ‍ित ऐशफोर्ड टाउन के जंगल वाले इलाके से साराह एवरार्ड का शव बरामद किया. 12 मार्च को क्राउन प्रॉस‍िक्यूसन सर्व‍िस से प्राध‍िकरण के बाद वेन कुजेन्स पर साराह के अपहरण और हत्या का आरोप लगाया गया. 13 मार्च को मज‍िस्ट्रेट कोर्ट ने वेन कुजेन्स को हिरासत में रखने का आदेश दिया. 16 मार्च को आरोपी को आपराध‍िक न्यायलय (Old Bailey) में पेश किया जाएगा.

अगर आप सोच रहे हैं कि जिस मह‍िला सुरक्षा की बात को इस आर्ट‍िकल में मैंने उठाया है उसमें तो बलात्कार की बात हो रही है तो फिर साराह एवरार्ड का संदर्भ क्यों दिया गया है, तो बता दें अपहरण और हत्या भी गंभीर अपराध हैं. और जब बात मह‍िला सुरक्षा की आती है तो इसमें मह‍िला के साथ हुए हर जोर-जबरदस्ती की बात भी होगी. मुद्दा यहां मह‍िलाओं की सुरक्षा का है, तो जाह‍िर है उससे जुड़ी हर बात होगी.

वापस अपने विषय पर लौटते हैं, हर साल मह‍िलाओं के लिए नौकरी और उनके विकास के लिए सरकारें कई दावे करती है. भारत ही नहीं बल्क‍ि सभी देशों में मह‍िलाओं के विकास को खूब तवज्जो दी जाती है, पर हकीकत तो दर्दनाक ही नजर आ रही है. World Population Review Rape Statistics के मुताबिक दुन‍ियाभर में 35 प्रतिशत मह‍िलाएं अपनी जिंदगी में यौन शोषण का श‍िकार हो चुकी हैं. अध‍िकांश देशों में रेप मामले के आंकड़े नहीं होने के कारण, मौजूदा आंकड़ों के मुताबिक 40 प्रतिशत से कम मह‍िलाएं शोषण के ख‍िलाफ मदद मांगती हैं और केवल 10 प्रतिशत मह‍िलाएं, सुरक्षा को लेकर कानून की मांग करती हैं. इन आंकड़ों का सीधा और साफ मतलब यही है कि मह‍िलाएं सुरक्ष‍ित नहीं हैं.

World Population Review Rape Statistics का डाटा देखें तो अमेर‍िका में 70 प्रतिशत रेप की घटनाएं उनके जानने वाले करते हैं. अमेर‍िका में रेप रेट 27.3 प्रतिशत है. दक्ष‍िण अफ्रीका में सबसे ज्यादा बलात्कार की घटनाएं दर्ज की गई है जो कि 100,000 लोगों में 132.4 घटनाएं हैं. बलात्कार के मामले में ये दस देश सबसे ज्यादा खतरनाक हैं- दक्ष‍िण अफ्रीका, बोस्टवाना, लेसोथो, स्वाजीलैंड, बरमुडा, स्वीडन, सुरीनेम, कोस्टारीका, निकारागुआ, ग्रेनाडा. थॉमस रायटर्स फाउंडेशन की एक सर्वे के मुताबिक 2018 में भारत मह‍िलाओं के लिए सबसे खतरनाक देश घोष‍ित किया गया था. National Crime Reports Bureau (NCRB) के आंकड़ें बताते हैं कि 2019 में मह‍िलाओं के ख‍िलाफ 4 लाख से अध‍िक अपराध रिपोर्ट किए गए थे. NCRB के डाटा के अनुसार हर दिन 88 रेप की घटनाओं को अंजाम दिया जाता है और यह अपराध मह‍िलाओं के ख‍िलाफ होने वाली घटनाओं का महज 10 प्रतिशत हिस्सा है. कई मामलों की श‍िकायत नहीं की जाती है जो कि दर्ज आंकड़ों से कहीं ज्यादा हो सकती है.

सुरक्षा के दावों का कागजी पैंतरा ना होता
तो हुंकार के बादलों का ये मौसम ना होता…

हंसने के बहाने मत ढूंढ

कभी कभी यूं बेवजह भी खुश रह लिया करो
बिना किसी गुदगुदी के भी हंस लिया करो
हर छोटी कामयाबी में मुस्कान तैरती रहती है
उसमें गोते लगाकर तुम भी उस फुहारे में भीग जाया करो
फ़िज़ूल का वक़्त यूं किसी को याद करने में न ज़ाया करो
बिना वजह हंसकर थोड़ा मन हल्का कर लिया करो
ज़रूरी नहीं कि कल तुम्हें ये मौका मिले
तो जब भी वक़्त आए खुश रहकर ज़िन्दगी जी लिया करो
ऐसा नहीं है कि हर किसी के पीछे कोई कारण हो
तो बिना किसी सवाल जवाब के उस गम को भूल जाया करो
एक ही ज़िन्दगी है मेरे यार, एक ही तुम हो
तो हर रोज घटती उम्र के साथ मरने के बजाए
रोज थोड़ी थोड़ी हंसकर तुम दिल को बहलाया करो
क्या फर्क पड़ता है कि तेरे चेहरे पर हंसी क्यों है
सुकून तो इस बात में है कि तू जो है खुश है….

She is MAD!

When she was young she had big imaginations big dreams, even if she could not accomplish it she would do alternate things similar to her dreams. For example once in a movie she saw a girl tearing a love letter and throwing it on the face of a guy who gave it to her, so, seeing this scene she was so fascinated that one day when her crush gave her a folded paper, she tore it and threw it on his face. Well later she found that it was exam paper not love letter. She just had to watch her imagination come true so she did it. Well she was a foolish she lived somewhere in non-fictious worlds but now no more.

Time passed and she had real dreams now, but still she tries the alternate ways to reach that goal. One more example I would be citing but an its different.

Her mother was from a different country, she had heard things about that country, beauty, cuisine, culture, clothes, gods, mountains and many things. The girl’s maternal grandparents died early when her mother was not even married. So, she could not learn more about her maternal parent’s house or land or anything from them. Nor her mother ever visited their homeland so she could not guide her about the ways to that country. All the facts and stories which she learnt from the internet or other people were stuck in her mind.

She was very determined to find out her mother’s relatives in that different country. She wanted to explore not only the country but her genes too. This was one of her dream, later on when she grew up became an independent woman, she made up her mind to visit her mother’s country. It was a big step because she knew nobody there, the only thing she had as her grandparent’s remainings were their pictures. All blurr, black & white, wrinkled face overall old images of two old people. But it did not matter to her. She was addicted to do stupid things.

She packed her bag and went on a way for discovery of her relatives. For weeks she could not find anybody who could recognize the pictures. She went to the local authorities, checked the names. She strolled down every street, did recce for hours. One fine day when she was just about to give up everything and come back, a person came by asking her about those pictures and the names. To her surprise she finally found her gandparent’s home, she cross checked everything and finally was confirmed that they were her relatives. It was one of the most beautiful day for her.

So this is how much crazy she can be. But if exploring something good and beneficial is called madness then she is happy to be called so. Let her be ‘MAD’ let her be how she is, she does not care.

मनहूस रात

रात भर जहाँ घुप अँधेरा रहता था
रात भर जहाँ सिर्फ और सिर्फ ख़ामोशी बहा करती थी
रात भर जहाँ घरों में एक मद्धम रौशनी जलती थी
रात भर जहाँ लोग थक हारकर नींद में आराम करते थे
आज उस रात की ख़ामोशी बेतहाशा टूट गयी थी
चारों ओर बस पीड़ा से भरी रुदन और विलाप था
बूढ़े से लेकर बच्चे तक गली में उस दर्द का हिस्सा बने थे
हर किसी के दिल में पीड़ा बेचैनी गुस्सा सब था
न जाने कौन सा मनहूस दिन था
जिसके बदले में ये मनहूस रात आयी थी
वहां जहाँ हर रात बस लालटेन की हलकी लौ जला करती थी
वहां चिता की अग्नि से बरबस सब खंडित हो गया था
माहौल बेहद भारी था, हर आँख आंसुओं में समायी थी
उनकी रूह में झांकों तो सिवाय बेबसी और तड़प के कुछ नहीं दिखाई पड़ता था
न जाने कौन सा मनहूस दिन था
जिसके बदले में ये मनहूस रात आयी थी….

ये पहली बार नहीं जब ऐसा कुकर्म हुआ था
पर हर बार नतीजा वही होता रहा है
लोग कुछ दिन आवाज तो उठाते हैं
पर फिर दबे पांव पीछे मुड़ जाते हैं
न्याय दिलाने कि कवायद सिर्फ घरवालों का रह जाता है
गद्दी पर बैठे राजा पैसों कि गठरी थमा देता है
संसोधन हो कानून की किताब में
अफसरों का काम अधूरा लगता है….

Live it Rock it

Live it as if you are gonna be left with no breath tomorrow
Laugh as if you are gonna shed bucket full of tears tomorrow
Let the feet get the bruise dancing bare feet on the sand
Let your hair swing as if it’s gonna dry tomorrow
Shout out loud sing out loud no matter you are a bad singer
Enjoy your own company let nobody break the rules and bring sorrow
Wear what you want eat what you want no matter what the shape of your body turns to
Death is surely gonna come one day not today but some day
Until then rock it live it enjoy the castle made of sand or marbles
Love yourself love your life dont be scared for the day you die
Once again live it rock it till your heart has enough of it…

वादियों से इश्क़

ये जो तस्वीर में कैद बादलों का झुरमुट है
पहाड़ों संग इश्क़ में डूबा हुआ लगता है
पता है कि उसे ऊंचे आसमान में गोते लगाना है
पर लगता है वादियों संग इक आखिरी मुलाक़ात जरूरी है
पता है उसे कि जमीं पर उसका कोई ठिकाना नहीं
पर मोहब्बत में ये बादल पागल कुछ दीवाना हुआ लगता है
देखो तो कैसे बाहें फैलाकर गले लगाना चाहता है
उसके आगोश में खुद को खत्म होने तक खो देना चाहता है…

(पता है मुझे कि इस तस्वीर में कुछ और भी बातें कहने को है, पर मेरा मन प्रकृति के इस अल्हड़पन को बयां करने का था, रेल की खिड़की और खिड़की से झांकती नज़रों में इस खूबसूरती को जाहिर कैसे करूं, सवाल था, पर फिर प्यार से बेहतर इस तस्वीर के लिए कोई अलंकार ना सुझा)

विचलित मन

प्रतीकात्मक तस्वीर

तमाशा चल रहा है
एक मुद्दा था वो अब दो हो गए
दोनों मुद्दे एक ही कारण से उपजे
पर जिस मुद्दे पर बहस छिड़ी
उसका नतीजा ज्यों का त्यों है
जो निकला वो ये कि दो औरत
निशाने पर आ गयी
एक लोगों के
तो दूसरी सरकार के
लड़ी तो दोनों
पर पुरुष प्रधान समाज ने
दोनों को फिर रौंद डाला है
कहीं कानून का रौब दिखाकर
तो कहीं सत्ता का बुलडोजर चलाकर
दोनों ही औरत है
कुछ तो ख्याल किया होता नालायकों
दोषी की खोज में यूं गिद्ध समान नोच डाला
द्रौपदी के चीरहरण की तरह
उसकी छवि का बलात्कार कर डाला
अरे इतनी शिद्दत से किसी के पीछे लगना ही था
तो उन बलात्कारियों के पीछे लगते ना
जो सड़कों पर आवारा सांड की तरह आज भी घूम रहे हैं
किसी की चारदीवारी तोड़नी ही थी
तो उन अवैध मकानों को तोड़ते ना
जो तुमने अपने काले धन से खड़ा कर रखा है
मैं किसी का पक्ष नहीं ले रही
ना दोनों की तरफदारी कर रही
पर दोनों के साथ जो बदसलूकी हुई
वो पराकाष्ठा थी किसी औरत की आबरू
सरेआम बाजार में बेचने की
लानत है तुझपर तेरी हैवानियत पर
तेरी झूठी मर्दानगी पर तेरी खोखली ताक़त पर….

शून्य

circle

दूर दूर तक कोई नहीं
ना किसी के सांस ही आहट
ना हवाओं की खुशबू
जो है वो बस मैं हूं
ब्रह्माण्ड के किसी छोर पर
केवल खुद के साथ
अपनी आत्मा की गठरी उठाये
शून्य सा प्रतीत होता
निर्जीव उस समय में
एकांत का आभास
खाली मन का प्रकाश
ना कोई कल्पना
ना वास्तविकता
जो है वो बस मैं हूं
ब्रह्माण्ड के किसी छोर पर
केवल खुद के साथ
अपनी आत्मा की गठरी उठाये
कहां नजर को ज़मीन दूं
किस ख्याल को आसमान
लक्ष्य की हो चुकी समाप्ति
नए सवेरे का नहीं इंतज़ार
शून्य के बिम्ब पर
बस मैं हूं और बस मैं…..